भारत का पहला वर्चुअल जू (India’s First Virtual Zoo)

India’s First Virtual Zoo
मध्य प्रदेश के इंदौर में भारत का पहला Virtual Zoo शुरू किया गया है। यह सुविधा कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (Indore Zoo) में लगभग 8,000 वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित की गई है। इसे Public-Private Partnership (PPP) मॉडल के तहत करीब ₹4.5 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। वर्चुअल जू में 3-D Dome Theatre, 14-D Cinema और Digital Jungle Safari जैसी तकनीकी सुविधाएं शामिल हैं, जो दर्शकों को वन्यजीव और जंगल का immersive अनुभव प्रदान करती हैं।

Key Points

  • स्थान: कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय, इंदौर, मध्य प्रदेश।
  • उपलब्धि: भारत का पहला Virtual Zoo।
  • क्षेत्रफल: लगभग 8,000 वर्ग फीट।
  • लागत: लगभग ₹4.5 करोड़।
  • मॉडल: Public-Private Partnership (PPP)।
  • मुख्य आकर्षण: 3-D Dome Theatre, 14-D Cinema और Digital Jungle Safari।
  • 14-D Cinema: Moving Seats, Wind, Water Spray, Fog, Bubbles और Vibrations सहित 14 sensory effects।
  • अन्य सुविधाएं: Gorilla-shaped entrance, 3D jungle pathways, glow garden, roar-simulating maze और Hanuman hologram।
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Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026

Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026

Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026

संसद ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को पारित कर दिया है। लोकसभा ने इसे 12 अगस्त 2026 और राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। बिल का मुख्य उद्देश्य खनिज क्षेत्र में टैक्स और लेवी व्यवस्था को अधिक समान एवं पूर्वानुमानित बनाना, खनन लागत कम करना तथा Critical Minerals की खोज और घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देना है। इसके तहत राज्य सरकारों की mineral rights और mineral-bearing lands पर नए टैक्स, cess या अन्य levies लगाने की शक्ति को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन किया गया है।
Key Points

  • बिल का नाम: Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026।
  • संसद से पारित: लोकसभा — 12 अगस्त 2026, राज्यसभा — 13 अगस्त 2026।
  • मुख्य उद्देश्य: Mining sector में uniform और predictable taxation framework स्थापित करना।
  • राज्यों की शक्ति पर सीमा: राज्य सरकारें mineral rights या mineral-bearing lands पर नए tax, cess या levy केंद्र द्वारा निर्धारित conditions/restrictions के बिना नहीं लगा सकेंगी।
  • Mineral-bearing land: केंद्र सरकार को ऐसे खनिज-युक्त क्षेत्रों के regulation से संबंधित अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं।
  • पुरानी बकाया लेवी: संशोधन लागू होने से पहले की ऐसी unpaid/unrecovered state levies को अमान्य माना जाएगा; हालांकि पहले से जमा/वसूल की गई राशि वापस नहीं की जाएगी।
  • खनन क्षेत्र को लाभ: अनिश्चित और अलग-अलग राज्य करों में कमी से mining operations की लागत और regulatory uncertainty कम हो सकती है।
    Critical Minerals: यह सुधार critical और strategic minerals की exploration तथा domestic mineral security को मजबूत करने के व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है।
  • Centre-State Relations: बिल से केंद्र और राज्यों के बीच fiscal federalism तथा mineral revenue को लेकर बहस बढ़ सकती है।
  • संवैधानिक पृष्ठभूमि: 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि राज्यों के पास mineral rights पर कर लगाने की legislative power है, जिसे संसद कानून द्वारा सीमित कर सकती है; बिल इसी संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
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पारछा वियर (Parcha Weir) बना World Heritage Irrigation Structure

Parcha Weir

Parcha Weir made World Heritage Irrigation Structure :

पारछा वियर (Parcha Weir ) को International Commission on Irrigation and Drainage (ICID) द्वारा World Heritage Irrigation Structure के रूप में मान्यता दी गई है। उत्तर प्रदेश के झांसी में बेतवा नदी पर स्थित इस ऐतिहासिक वियर का निर्माण 1881–1886 के बीच हुआ था। लगभग 140 वर्ष पुरानी यह सिंचाई संरचना भारत की ऐतिहासिक जल-प्रबंधन विरासत को दर्शाती है। ICID की स्थापना 1950 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

Key Points

  • मान्यता: World Heritage Irrigation Structure
  • स्थान: झांसी, उत्तर प्रदेश
  • नदी: बेतवा नदी
  • निर्माण: 1881–1886
  • विशेषता: लगभग 140 वर्ष पुराना ऐतिहासिक वियर
  • मान्यता देने वाली संस्था: ICID
  • ICID स्थापना: 1950
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
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गज गौरव अवार्ड 2026 (Gaj Gaurav Award 2026)

Gaj Gaurav Award 2026

गज गौरव अवार्ड 2026 (Gaj Gaurav Award 2026)

गज गौरव अवार्ड 2026 Gaj Gaurav Award 2026) के तहत हाथी संरक्षण और उनके संरक्षण प्रयासों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 7 महावतों को सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार की शुरुआत 2022 में हुई थी। यह पहल Project Elephant से जुड़ी है, जिसे भारत सरकार ने 1992 में शुरू किया था। पुरस्कार से संबंधित कार्य पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं। जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल में स्थित है और यह एक सींग वाले गैंडे तथा हाथियों के लिए प्रसिद्ध है।

Key Points

  • पुरस्कार: गज गौरव अवार्ड 2026
  • सम्मानित: 7 महावत
  • उद्देश्य: हाथी संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान
  • पुरस्कार की शुरुआत: 2022
  • Project Elephant: 1992 में शुरू
  • संबंधित मंत्रालय: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  • जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान: पश्चिम बंगाल; एक सींग वाले गैंडे और हाथियों के लिए प्रसिद्ध
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