Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026
संसद ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को पारित कर दिया है। लोकसभा ने इसे 12 अगस्त 2026 और राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। बिल का मुख्य उद्देश्य खनिज क्षेत्र में टैक्स और लेवी व्यवस्था को अधिक समान एवं पूर्वानुमानित बनाना, खनन लागत कम करना तथा Critical Minerals की खोज और घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देना है। इसके तहत राज्य सरकारों की mineral rights और mineral-bearing lands पर नए टैक्स, cess या अन्य levies लगाने की शक्ति को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन किया गया है।
Key Points
- बिल का नाम: Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026।
- संसद से पारित: लोकसभा — 12 अगस्त 2026, राज्यसभा — 13 अगस्त 2026।
- मुख्य उद्देश्य: Mining sector में uniform और predictable taxation framework स्थापित करना।
- राज्यों की शक्ति पर सीमा: राज्य सरकारें mineral rights या mineral-bearing lands पर नए tax, cess या levy केंद्र द्वारा निर्धारित conditions/restrictions के बिना नहीं लगा सकेंगी।
- Mineral-bearing land: केंद्र सरकार को ऐसे खनिज-युक्त क्षेत्रों के regulation से संबंधित अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं।
- पुरानी बकाया लेवी: संशोधन लागू होने से पहले की ऐसी unpaid/unrecovered state levies को अमान्य माना जाएगा; हालांकि पहले से जमा/वसूल की गई राशि वापस नहीं की जाएगी।
- खनन क्षेत्र को लाभ: अनिश्चित और अलग-अलग राज्य करों में कमी से mining operations की लागत और regulatory uncertainty कम हो सकती है।
Critical Minerals: यह सुधार critical और strategic minerals की exploration तथा domestic mineral security को मजबूत करने के व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है।
- Centre-State Relations: बिल से केंद्र और राज्यों के बीच fiscal federalism तथा mineral revenue को लेकर बहस बढ़ सकती है।
- संवैधानिक पृष्ठभूमि: 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि राज्यों के पास mineral rights पर कर लगाने की legislative power है, जिसे संसद कानून द्वारा सीमित कर सकती है; बिल इसी संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
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